हथकरघा की विरासत को बाजार से जोड़ने पर जोर, नाबार्ड ने 60 बुनकरों-कारीगरों से किया सीधा संवाद

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भवाली/नैनीताल – राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर नाबार्ड नैनीताल की ओर से बुधवार को देवभूमि होमस्टे, भवाली में बुनकरों एवं कारीगरों के लिए एक दिवसीय जागरूकता एवं संवाद कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम का उद्देश्य स्थानीय हथकरघा एवं हस्तशिल्प से जुड़े लोगों को प्रोत्साहित करने के साथ उनके उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने, वित्तीय सहायता दिलाने और सरकारी योजनाओं से जोड़ना रहा।

कार्यशाला में भीमताल विकासखंड के करीब 60 बुनकरों, कारीगरों एवं अन्य हितधारकों ने प्रतिभाग किया। कार्यक्रम में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल, अग्रणी जिला प्रबंधक अमित बाजपेयी, जन शिक्षण संस्थान के प्रतिनिधि गोपाल, जिला उद्योग केंद्र के प्रतिनिधि, विभिन्न बैंकों एवं गैर-सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधि, आरसेटी निदेशक गितेश त्रिपाठी समेत अन्य लोग मौजूद रहे।

प्रशिक्षण से बाजार तक कारीगरों को जोड़ने पर जोर

कार्यशाला में हथकरघा एवं हस्तशिल्प क्षेत्र से जुड़े विभिन्न विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। बुनकरों और कारीगरों को प्रशिक्षण, स्वरोजगार, ऋण एवं वित्तीय सहायता, उद्यम विकास, उत्पाद विविधीकरण, पैकेजिंग तथा बाजार से जुड़ने के अवसरों की जानकारी दी गई।

बैंक प्रतिनिधियों ने कारीगरों को औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने और अपनी आवश्यकता के अनुसार ऋण सुविधाओं का लाभ उठाकर उद्यमों को मजबूत करने के लिए प्रेरित किया।

नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक मुकेश बेलवाल ने कहा कि उत्तराखंड की पारंपरिक हथकरघा एवं हस्तशिल्प कला राज्य की सांस्कृतिक विरासत और स्थानीय पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि कारीगरों के हुनर को प्रशिक्षण, वित्तीय समावेशन, बेहतर पैकेजिंग, उत्पादों में विविधता और बाजार संपर्क के माध्यम से नई ऊंचाई दी जा सकती है।

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कारीगरों ने खुलकर बताईं अपनी चुनौतियां

कार्यशाला की खासियत यह रही कि यह केवल सरकारी योजनाओं की जानकारी तक सीमित नहीं रही। बुनकरों और कारीगरों के साथ सीधा संवाद किया गया। प्रतिभागियों ने उत्पादन, कच्चे माल की उपलब्धता, प्रशिक्षण, वित्तीय जरूरतों, बाजार और उत्पादों की बिक्री से जुड़ी व्यावहारिक समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं।

अधिकारियों और विभागीय प्रतिनिधियों ने समस्याओं पर चर्चा करते हुए उपलब्ध संस्थागत व्यवस्थाओं के माध्यम से समाधान की संभावनाओं पर विचार किया।

10 बुनकर-कारीगर हुए सम्मानित

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर स्थानीय कला, कौशल एवं परंपरा को आगे बढ़ाने में उल्लेखनीय योगदान देने वाले करीब 10 बुनकरों एवं कारीगरों को नाबार्ड की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मान पाने वाले कारीगरों ने इसे अपने हुनर के प्रति प्रोत्साहन बताते हुए पारंपरिक कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

बैंकिंग सुविधाओं का लाभ उठाने का आह्वान

अग्रणी जिला प्रबंधक अमित बाजपेयी ने कारीगरों को बैंकिंग क्षेत्र में उपलब्ध विभिन्न वित्तीय सुविधाओं की जानकारी दी। उन्होंने पात्र कारीगरों से योजनाओं का अधिकाधिक लाभ उठाने का आह्वान किया। अन्य विभागीय प्रतिनिधियों ने भी हथकरघा, हस्तशिल्प, कौशल विकास और स्वरोजगार से संबंधित योजनाओं की जानकारी साझा की।

कार्यशाला में बुनकरों, कारीगरों, बैंकों, सरकारी विभागों और विकास संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर जोर दिया गया। साथ ही स्थानीय उत्पादों की पहचान मजबूत करने, कारीगरों की आय बढ़ाने और पारंपरिक कौशल को टिकाऊ ग्रामीण आजीविका से जोड़ने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई गई।


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