मेडिकल, बैलिस्टिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की वैज्ञानिक जांच पर मंथन, चेन ऑफ कस्टडी मजबूत बनाने पर जोर

भवाली (नैनीताल) – उत्तराखंड न्यायिक एवं विधिक अकादमी, भवाली में “मेडिकल ज्यूरिस्प्रूडेंस, बैलिस्टिक्स एविडेंस, साइबर क्राइम एंड हैंडलिंग तथा एडमिसिबिलिटी एंड अप्रिसिएशन ऑफ इलेक्ट्रॉनिक एविडेंस” विषय पर महत्वपूर्ण शैक्षणिक एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में न्यायपालिका, पुलिस, अभियोजन, चिकित्सा, फोरेंसिक, बैलिस्टिक्स एवं साइबर विशेषज्ञों ने प्रतिभाग किया।

कार्यक्रम में अपराध की विवेचना में मेडिकल, बैलिस्टिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की भूमिका, उनके संकलन, संरक्षण, सत्यापन तथा न्यायालय में स्वीकार्यता पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने कहा कि डिजिटल माध्यमों के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध की जांच में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है। ऐसे में डिजिटल उपकरणों से प्राप्त साक्ष्यों को वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित रखना और उनकी चेन ऑफ कस्टडी बनाए रखना आवश्यक है।

छोटी चूक भी बदल सकती है ट्रायल की दिशा

कार्यक्रम में मुख्य न्यायाधीश उत्तराखंड मनोज कुमार गुप्ता ने विवेचना में साक्ष्यों की शुद्धता और चेन ऑफ कस्टडी के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अल्मोड़ा के ट्रिपल मर्डर केस का उल्लेख करते हुए कहा कि पिथौरागढ़ से देहरादून तक साक्ष्य की चेन में आने वाला छोटा सा गैप, एफआईआर और जीडी एंट्री, मौके पर पंचनामा बनाने अथवा साक्ष्य को ठीक से सील नहीं करने जैसी छोटी-छोटी कमियां पूरे ट्रायल के भविष्य को प्रभावित कर सकती हैं।

उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सही तरीके से रखरखाव पर भी जोर दिया। लैपटॉप, सीडी और अन्य डिजिटल उपकरणों को निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार सुरक्षित रखना और उनकी हैंडलिंग में सावधानी बरतना जरूरी है।

उन्होंने कहा कि विवेचक, चिकित्सक और फोरेंसिक विशेषज्ञों को भयमुक्त होकर वैज्ञानिक पद्धति से कार्य करना चाहिए। विधिक, चिकित्सीय और तकनीकी ज्ञान को अलग-अलग विभागों तक सीमित रखने के बजाय आपसी समन्वय के साथ इस्तेमाल किया जाना चाहिए, ताकि जांच सत्य की गहराई तक पहुंच सके।

हर केस में मजबूत हो चेन ऑफ कस्टडी

कार्यक्रम में चेन ऑफ कस्टडी को लेकर मानक प्रक्रिया (SOP) पर भी विशेष चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि बाल, खून अथवा अन्य कोई भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मिलने पर उसे मौके पर ही सील किया जाना चाहिए। वहीं आवश्यक पंचनामा और दस्तावेजी कार्रवाई पूरी करने के बाद साक्ष्य को मालखाने में जमा किया जाए। इसके बाद मालखाना रजिस्टर और जीडी में आवश्यक प्रविष्टियां कराकर नियमानुसार एफएसएल भेजा जाना चाहिए।

इस दौरान यह भी बताया गया कि यदि एफएसएल ले जाने वाला कर्मचारी अवकाश पर जा रहा है तो साक्ष्य को अपने पास रखने के बजाय उसे नियमानुसार मालखाने में वापस जमा किया जाना चाहिए। साक्ष्य की पूरी प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर गैप नहीं होना चाहिए।

पुलिस अकेले नहीं कर सकती विवेचना : मैथाणी

कार्यशाला को संबोधित करते हुए हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रविंद्र मैथाणी ने कहा कि विवेचना केवल पुलिस का कार्य नहीं है। वर्तमान समय में किसी भी आपराधिक मामले की प्रभावी विवेचना के लिए मेडिकल, बैलिस्टिक और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की अहम भूमिका है।

उन्होंने कहा कि जांच के दौरान यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि एकत्र किया गया साक्ष्य न्यायालय में स्वीकार्य है या नहीं। वैज्ञानिक साक्ष्यों को सही तरीके से जुटाने और प्रस्तुत करने के लिए पुलिस, चिकित्सकों, फोरेंसिक विशेषज्ञों और अभियोजन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।

विभागीय समन्वय से बेहतर होगी विवेचना : प्रदीप पंत

उत्तराखंड न्यायिक एवं विधिक अकादमी के निदेशक प्रदीप पंत ने कहा कि अपराध की प्रकृति लगातार बदल रही है। ऐसे में केवल पारंपरिक पुलिस विवेचना पर्याप्त नहीं है। मेडिकल एविडेंस, बैलिस्टिक एविडेंस और इलेक्ट्रॉनिक एवं साइबर एविडेंस की आवश्यकता बढ़ गई है।

उन्होंने कहा कि एकत्र किए गए साक्ष्य की न्यायालय में स्वीकार्यता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। कार्यशाला का उद्देश्य विभिन्न विभागों के अधिकारियों को एक मंच पर लाकर एक-दूसरे की व्यावहारिक कठिनाइयों को समझना और बेहतर समन्वय के साथ गुणवत्तापूर्ण विवेचना सुनिश्चित करना है।

अपर निदेशक शादाब बानो ने बताया गिरफ्तारी और साक्ष्य संबंधी प्रक्रिया

अपर निदेशक शादाब बानो ने चेन ऑफ कस्टडी और संवैधानिक सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर जानकारी दी। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी के समय व्यक्ति को केवल गिरफ्तारी के कारण की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि Ground of Arrest यानी गिरफ्तारी के आधार की जानकारी देना भी आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट जबरन नहीं कराए जा सकते। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के सेल्वी बनाम कर्नाटक मामले के निर्णय का भी उल्लेख किया गया।

कार्यशाला में प्रतिभागियों ने इस बात पर जोर दिया कि विवेचक, चिकित्सक और फोरेंसिक विशेषज्ञ भयमुक्त होकर वैज्ञानिक तरीके से कार्य करें तथा विभिन्न विभागों के बीच बेहतर तालमेल स्थापित किया जाए।

वैज्ञानिक और निर्बाध न्याय प्रक्रिया का लिया संकल्प

कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने संकल्प लिया कि जहां भी विवेचना और साक्ष्य की प्रक्रिया में व्यवस्था संबंधी कठिनाई सामने आती है, वहीं से सुधार की शुरुआत की जाएगी। अपराध स्थल से लेकर एफएसएल और न्यायालय तक साक्ष्यों की सुरक्षित एवं वैज्ञानिक यात्रा सुनिश्चित करने, चेन ऑफ कस्टडी को मजबूत बनाने और न्यायिक प्रक्रिया को अधिक प्रभावी एवं विश्वसनीय बनाने के लिए सभी संबंधित विभाग समन्वय के साथ कार्य करेंगे।