
हल्दुचौड़ – लाल बहादुर शास्त्री राजकीय महाविद्यालय, हल्दुचौड़ में स्नातकोत्तर (पीजी) कक्षाओं के संचालन की वर्षों पुरानी मांग अब गंभीर रूप लेती जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के इस प्रमुख महाविद्यालय में अध्ययनरत सैकड़ों छात्र-छात्राएं लंबे समय से एम.ए. योगा सहित विभिन्न विषयों में पीजी कक्षाएं शुरू करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं हो सकी है। इससे छात्रों में गहरा आक्रोश व्याप्त है।
सोमवार को छात्र संघ के पदाधिकारियों और छात्र नेताओं ने एकजुट होकर महाविद्यालय के प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान छात्र संघ कोषाध्यक्ष कमल चंद्र पांडे, उपाध्यक्ष संजना पांडे और छात्र नेता सुमित सिंह कार्की के नेतृत्व में छात्रों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर पीजी कक्षाओं का संचालन शुरू नहीं किया गया, तो वे आमरण अनशन सहित उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
ज्ञापन में छात्रों ने कहा कि यह मांग कोई नई नहीं है, बल्कि कई वर्षों से लगातार उठाई जा रही है। हर बार केवल आश्वासन मिलता है, लेकिन धरातल पर कोई ठोस कार्यवाही नहीं हो पाती। इसके चलते यह समस्या अब केवल शैक्षणिक न रहकर सामाजिक और आर्थिक संकट का रूप ले चुकी है।
महाविद्यालय में स्नातक स्तर पर बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं, लेकिन पीजी कक्षाओं के अभाव में उन्हें हल्द्वानी और नैनीताल जैसे शहरों का रुख करना पड़ता है। इससे छात्रों पर किराया, भोजन, परिवहन सहित अन्य खर्चों का अतिरिक्त बोझ पड़ता है, जिसे आर्थिक रूप से कमजोर परिवार वहन नहीं कर पाते। परिणामस्वरूप कई छात्र-छात्राएं अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ने को मजबूर हो जाते हैं।
छात्राओं के लिए यह समस्या और भी गंभीर बनी हुई है। दूरी, सुरक्षा और सामाजिक कारणों के चलते कई छात्राएं स्नातक के बाद आगे की पढ़ाई जारी नहीं रख पातीं, जिससे उनके भविष्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा का अभाव क्षेत्र की बेटियों के लिए बड़ी बाधा बनता जा रहा है।
छात्र संघ कोषाध्यक्ष कमल चंद्र पांडे ने कहा कि वर्षों से चली आ रही इस मांग की अनदेखी अब असहनीय हो चुकी है। वहीं छात्र नेता सुमित सिंह कार्की ने इसे छात्रों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार और प्रशासन से शीघ्र कार्रवाई की मांग की। उपाध्यक्ष संजना पांडे ने कहा कि महाविद्यालय में पीजी कक्षाएं शुरू होने से छात्राओं को विशेष राहत मिलेगी और क्षेत्र में शिक्षा का स्तर भी बेहतर होगा।
छात्र संघ ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी मांगों की अनदेखी की गई, तो आंदोलन को व्यापक रूप दिया जाएगा। फिलहाल प्रशासन को एक सप्ताह का समय दिया गया है, जिसके बाद महाविद्यालय परिसर में आमरण अनशन सहित विभिन्न लोकतांत्रिक आंदोलन शुरू किए जाएंगे।
इस दौरान कमल चंद्र पांडे, सुमित सिंह कार्की, मनीष शर्मा, पूर्व छात्र संघ सचिव खजान चंद्र आर्य, संजना पांडे, रोहित नेगी, गोविन्द कुमार, बादल जीना, आयुष, ऋषभ, सागर, भावेश, कुनाल एवं कृष्णा भाकुनी सहित अनेक छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
अब देखना होगा कि प्रशासन इस लंबे समय से लंबित मांग पर कितनी गंभीरता दिखाता है या छात्रों को अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर उतरना पड़ेगा।


