मनरेगा को लेकर लालकुआँ में बीजेपी और कांग्रेस आमने-सामने

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रोज़गार योजना पर घमासान: बीजेपी ने बताया विकास का मॉडल, कांग्रेस ने कहा नाम बदलने की राजनीति

लालकुआँ – (संवाददाता ज़फर अंसारी) लालकुआँ में मनरेगा योजना को लेकर एक बार फिर भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच सियासी टकराव देखने को मिला। हल्दूचौड़ स्थित अपने आवास पर आयोजित प्रेस वार्ता में भाजपा के पूर्व विधायक नवीन चन्द्र दुम्का ने कांग्रेस के विरोध पर तीखा प्रहार किया।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस केवल दिखावे के लिए मनरेगा को लेकर विरोध कर रही है। कांग्रेस को इस बात पर आपत्ति है कि योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाया गया, जबकि अपने शासनकाल में कांग्रेस ने गांधी जी के नाम पर कोई ठोस कार्य नहीं किया। दुम्का ने आरोप लगाया कि कांग्रेस शासन के दौरान मनरेगा में बड़े पैमाने पर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई थीं। फर्जी मास्टर रोल बनाकर मजदूरों की मजदूरी में भ्रष्टाचार किया गया, जिससे वास्तविक श्रमिकों को नुकसान हुआ।

भाजपा के पूर्व विधायक ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लाया गया नया विकसित भारत अधिनियम ग्रामीण विकास की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे वास्तविक मजदूरों को सीधा लाभ मिलेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में यह योजना मील का पत्थर साबित होगी।

उन्होंने जानकारी दी कि जहां पहले मनरेगा के तहत 100 दिनों का रोजगार मिलता था, वहीं अब इसे बढ़ाकर 125 दिन किया जाएगा। मजदूरी का भुगतान सात दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा और विलंब होने पर अतिरिक्त राशि भी दी जाएगी। उन्होंने कांग्रेस को जनविरोधी मानसिकता वाली पार्टी करार दिया।

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वहीं दूसरी ओर, वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरेन्द्र बोरा और युवा नेता हेमवती नन्दन दुर्गापाल ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए भाजपा पर तीखे आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार योजनाओं के नाम बदलने में “मास्टर” बन चुकी है। भाजपा देश को बांटने और जनता को भटकाने की राजनीति कर रही है, जो देशहित में नहीं है।

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि पूंजीपतियों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से मनरेगा का नाम बदला गया है और यह ‘एक तीर से दो शिकार’ करने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि बार-बार बदलाव कर मनरेगा की मूल भावना को कमजोर किया जा रहा है। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि भाजपा की मंशा यह है कि गरीब और गरीब होता जाए तथा अमीर और अधिक अमीर बनता जाए।

उन्होंने साफ कहा कि कांग्रेस भाजपा की इस नीति को सफल नहीं होने देगी। मनरेगा को बचाने के लिए कांग्रेस संसद से लेकर सड़क तक जन आंदोलन चलाएगी, जिसकी शुरुआत उत्तराखण्ड से हो चुकी है। कांग्रेस नेताओं ने दावा किया कि जैसे काले कृषि कानूनों को वापस लेना पड़ा था, उसी तरह केंद्र सरकार को मनरेगा से जुड़े फैसलों पर भी पुनर्विचार करना पड़ेगा।


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