चार श्रम संहिताओं के खिलाफ सड़कों पर उतरे श्रमिक-किसान, रुद्रपुर में गांधी पार्क से बाजार तक जोरदार प्रदर्शन

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रुद्रपुर – श्रमिक संयुक्त मोर्चा, उधम सिंह नगर के बैनर तले बुधवार को श्रमिकों, किसानों, आशा वर्कर्स, भोजनमाताओं सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने एकदिवसीय हड़ताल कर गांधी पार्क में विशाल सभा का आयोजन किया। सभा के बाद कार्यकर्ताओं ने बाजार क्षेत्र में जुलूस निकालते हुए सरकार से चार श्रम संहिताओं समेत अन्य काले कानूनों को रद्द करने की जोरदार मांग की।

सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा लागू की गई चार श्रम संहिताएं मजदूरों के अधिकारों पर सीधा हमला हैं। इन कानूनों के जरिए मजदूर वर्ग को पूंजीपतियों का गुलाम बनाने की साजिश की जा रही है। नए श्रम कोड्स के तहत 8 घंटे कार्यदिवस की व्यवस्था को कमजोर कर 12 घंटे काम कराने का रास्ता खोला गया है, वहीं स्थायी रोजगार की जगह फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट लागू कर श्रमिकों की नौकरी सुरक्षा समाप्त की जा रही है।

वक्ताओं ने आरोप लगाया कि इन श्रम संहिताओं में मजदूरों के यूनियन बनाने और सामूहिक सौदेबाजी के अधिकारों को सीमित किया गया है। लगभग 70 प्रतिशत फैक्ट्रियों को श्रम कानूनों के दायरे से बाहर करने का प्रावधान मजदूरों को मालिकों की दया पर छोड़ देगा। इससे ऑक्यूपेशनल सेफ्टी, सामाजिक सुरक्षा और मजदूरी से जुड़े अधिकार लगभग समाप्त हो जाएंगे।

सभा में यह भी कहा गया कि ये कानून बिना किसी व्यापक परामर्श, भारतीय श्रम सम्मेलन आयोजित किए बिना और अंतरराष्ट्रीय श्रम मानकों की अनदेखी करते हुए लाए गए हैं, जबकि भारत इन मानकों का हस्ताक्षरकर्ता है।

वक्ताओं ने सरकार पर किसानों के खिलाफ भी नीतियां लाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि बीज अधिनियम जैसे कानूनों और अमेरिका के साथ की गई ट्रेड व टैरिफ डील से भारतीय किसानों और देश की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच रहा है। विदेशी अनाज के आयात से देश के अन्नदाता किसानों की आजीविका खतरे में है।

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सभा में यह भी कहा गया कि रेलवे, बंदरगाह, कोयला, तेल, स्टील, रक्षा, बैंक, बीमा, दूरसंचार, बिजली उत्पादन व आपूर्ति जैसे सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों का लगातार निजीकरण कर सरकार कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा दे रही है। बजट 2026-27 भी इसी दिशा में कदम बढ़ाता नजर आ रहा है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण के संकेत श्रमिकों और आम जनता के लिए चिंताजनक हैं।

सभा को सीएसटीयू महासचिव मुकुल, इंकलाबी मजदूर केंद्र के शहर सचिव कैलाश भट्ट, भाकपा (माले) जिला सचिव ललित मटियाली, जनकवि बल्ली सिंह चीमा, किसान यूनियन उग्राहा के नेता अवतार सिंह, मजदूर अधिकार संघर्ष अभियान मासा के सुरेंद्र, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव सिंह, प्रगतिशील महिला एकता केंद्र की रविंद्र कौर, भूमि बचाओ आंदोलन के नेता जगतार सिंह बाजवा, अखिल भारतीय किसान सभा के प्रदेश अध्यक्ष गंगाधर नौटियाल, ऐक्टू जिला सचिव अनिता अन्ना, सीटू के जगदेव सिंह, उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन की राज्य उपाध्यक्ष रीता कश्यप, ममता पानू, माकपा नेता राजेंद्र सिंह सहित कई वक्ताओं ने संबोधित किया।

सभा में उत्तराखंड आशा हेल्थ वर्कर्स यूनियन, प्रगतिशील भोजनमाता संगठन, विभिन्न औद्योगिक यूनियनों और सामाजिक संगठनों से जुड़े सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

सभा के बाद कार्यकर्ताओं ने बाजार क्षेत्र में जुलूस निकालकर सरकार की नीतियों के खिलाफ नारेबाजी की।


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