
रुद्रपुर (उत्तराखंड) – रुद्रपुर स्थित शहीद भगत सिंह पुस्तकालय में आयोजित स्मृति चर्चा कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षक और संस्कृतिकर्मी डॉ. राजेंद्र कुमार के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने उन्हें एक ऐसे रचनाकार के रूप में याद किया, जो जनसरोकारों से गहराई से जुड़े रहते हुए शांत भाव से अपने साहित्यिक कर्म में सक्रिय रहे।
उल्लेखनीय है कि डॉ. राजेंद्र कुमार का 16 जनवरी को दुखद निधन हो गया था। उनकी स्मृति में 15 फरवरी की शाम आयोजित इस चर्चा में साहित्य, संस्कृति और शिक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को याद किया गया। वक्ताओं ने बताया कि इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्यापन के दौरान वे विद्यार्थियों से मित्रवत संबंध रखते थे और साहित्य व संस्कृति के क्षेत्र में उनकी सक्रियता जनपक्षधर रही।
कार्यक्रम के दौरान उनके लेखों और चुनिंदा कविताओं का पाठ भी किया गया, जिसे वक्ताओं ने उनके विचारशील और संवेदनशील व्यक्तित्व का प्रतिबिंब बताया। चर्चा में यह भी कहा गया कि वे एक लोकप्रिय अध्यापक होने के साथ-साथ साहित्यिक अभिभावक, संपादक और सृजनशील व्यक्तित्व के धनी थे। उनमें वैचारिक दृढ़ता के साथ व्यावहारिक लचीलापन, शालीनता और लोकतांत्रिक दृष्टि स्पष्ट रूप से दिखाई देती थी।
वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि डॉ. राजेंद्र कुमार को स्मरण करने की सार्थकता तभी है, जब उनके विचारों, सक्रिय योगदान और समतामूलक समाज के सपने को आगे बढ़ाया जाए।
स्मृति चर्चा में वरिष्ठ साहित्यकार शंभू पांडे शैलेय, सृजन पुस्तकालय की ऊषा टम्टा, डॉ. राजेश प्रताप सिंह, प्रोफेसर भूपेश कुमार सिंह, पत्रकार असलम कोहरा, शिक्षक संदीप कुमार, अंज़ार अहमद, महेंद्र राणा, धीरज जोशी, हरेंद्र सिंह और सुधीर कुमार सहित अनेक लोगों ने सहभागिता की।
कार्यक्रम का संचालन सामाजिक कार्यकर्ता मुकुल ने किया। स्मृति चर्चा का समापन डॉ. राजेंद्र कुमार के विचारों और रचनात्मक विरासत को आगे बढ़ाने के संकल्प के साथ हुआ।


