ईदगाह बचाओ समिति के आव्हान पर एक दिवसीय उपवास कार्यक्रम में विभिन्न समुदायों के जनप्रतिनिधियों ने किया प्रतिभाग

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रूद्रपुर – (एम सलीम खान संवाददाता) पूर्व में दी गईं सूचना के अनुसार आज ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले हजारों की संख्या में महिलाओं सहित लोगों का भारी हुजूम गाँधी पार्क रुद्रपुर पहुंचा।एक दिवसीय सत्याग्रह प्रारम्भ करते हुए सभी लोग सामूहिक रूप से उपवास पर बैठे।नगर निगम और प्रशासन द्वारा अन्यायपूर्ण तरीके से ईदगाह की कब्ज़ाई गईं जमीन को तत्काल खाली करके उसे पीड़िता मुस्लिम समुदाय को हस्तगत करने और अंकिता भंडारी को न्याय देने की मांग को जोरदार तरीके से उठाया गया।

कार्यक्रम की शुरुआत में अंकिता भंडारी की याद में दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया। अंकिता भंडारी को न्याय देने, वी आई पी को जेल में डालने और जनभावना के तहत पूरे प्रकरण की सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जाँच कराने की एकस्वर में मांग की गईं।

कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि नगर निगम और प्रशासन द्वारा 7 दिसंबर 2025 को ईदगाह की उपरोक्त मैदान में अन्याय पूर्ण तरीके से कब्जा करके ऊँची ऊँची दीवारें चिनकर,घेरकर उसे सीलबंद कर दिया गया।नगर निगम और प्रशासन द्वारा ऐसा करने से पहले पीड़ित मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों, समाजसेवियों ,वहाँ स्थित इदगाह, मदरसे,मस्जिद, कब्रिस्तान और क़रबला, मजार आदि संस्थाओं के प्रमुखों से राय मशविरा तक नहीं किया गया।

उन्हें अपना पक्ष रखने का अवसर भी नहीं दिया गया। जो कि प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का घोर उल्लंघन है। अन्याय है। वक्ताओं ने कहा कि जिस जमीन को प्रशासन द्वारा कब्जे में लेकर सीलबंद किया गया है वहाँ पर ईदगाह,स्कूल,मदरसा, कब्रिस्तान, मस्जिद,करबला, मजार आदि संस्थाएं स्थित हैं।

वहाँ पर बारात घर भी स्थित है। वहाँ स्थित स्कूल, मदरसा में पढ़ने वाले छात्रों और क्षेत्र के बच्चों का खेल का मैदान भी वही ईदगाह मैदान था,जो अब उनसे छिन गया है। कब्रिस्तान की जगह भी छिन गईं है।अब कब्रिस्तान के लिए बहुत ही छोटी जगह छोड़ी गईं हैं, जिसमें दफनाये गये शव ताजे हैं।अब यहां के लोग नये शवों को दफनाने के लिए ताजी कब्रों को खोदने को मजबूर होंगे। कोरोना जैसी महामारी आने पर, कोई दुर्घटना होने पर कैसी भयानक स्थिति होगी, इसे सोचकर ही मन विचलित होता है कि वह मंजर कैसा होगा।

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कि प्रशासन द्वारा दीवार चिनी गईं दीवार और की गईं सीलबंदी से रेशमबाड़ी/दूधिया नगर / पहाड़गंज से आने जाने वाले नमाजियों,और मृतकों के जनाजों को कब्रिस्तान में दफनाने को लाने का आम रास्ता भी बंद हो गया है।इससे पहले जो दूरी करीब 10 मीटर की थी अब यह एक डेढ़ किलोमीटर हो गईं है, जो कि भीड़भाड़ वाले इलाके से होकर जाती है।

हर साल मुहरर्म के अवसर पर निकाले जाने वाले जुलुस और ताजिये को कब्रिस्तान में दफन करने का भी यही रास्ता है। जो पहले करीब मात्र 10 मीटर दूर था, अब यह आम रास्ता बंद कर दिए जाने के बाद यदि अब प्रशासन द्वारा इस हेतु नये रूट से मुहरर्म का जुलुस निकालने की अनुमति दी जाती है, तो वह काफ़ी लम्बा होगा और भीड़भाड़ वाले रास्ते से होकर गुजरेगा।

जिससे इस बात की प्रबल संभावना है कि असामाजिक व सांप्रदायिक तत्वों द्वारा माहौल खराब करने की पूरी कोशिश की जायेगी, जिससे कानून व्यवस्था का संकट उत्पन्न होने की संभावना उत्पन्न होने से इंकार करना घोर लापरवाही होगी। जबकि वर्तमान समय में भी ऐसे घृणित तत्वों द्वारा उक्त स्थान को गंगाजल छिड़ककर, हनुमान चालीसा पढ़कर शुद्ध करने, मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय को अतिक्रमणकारी ठहराकर आदि भड़काऊ बयानबाजी करके माहौल खराब करने की पूरी कोशिश की गईं।

पूर्व में भी ऐसे ही सांप्रदायिक तत्वों द्वारा शहर का माहौल खराब किया जा चुका है।किन्तु प्रशासन द्वारा अपने संवैधानिक दायित्वों का निर्वाह करके उक्त खुराफाती तत्वों के खिलाफ कार्यवाही करने के स्थान पर उक्त आम रास्ते को बंद करके समस्याओं को ही बढ़ाने का काम किया जा रहा है। जो बहुत ही चिंताजनक है।

कि सत्य यह है कि ईदगाह के उपरोक्त मैदान में पीड़ित मुस्लिम समुदाय ने एक इंट तक नहीं लगाई है। खुद नगर निगम द्वारा ही पूर्व में वहां बारात घर/सेड का निर्माण किया गया।काफ़ी समय पहले वहां विधायक निधि से दीवार भी बनाइ गईं। किन्तु आज झूठी कहानी गढ़कर पीड़ित मुस्लिम समुदाय को ही अतिक्रमण कारी के रूप में प्रचारित करके बदनाम किया जा रहा है।

खेल हेतु खेलकूद का मैदान बच्चों की शिक्षा व मानसिक – शारीरिक विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।किन्तु नगर निगम व प्रशासन द्वारा मैदान की सील बंदी करके वहाँ के छात्रों और बच्चों से यह अधिकार छीनकर उनके बाल अधिकारों का घोर उल्लंघन किया गया है।

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कि वहां स्थित बारात घर हर समुदाय के लोगों के लिए हर समय खुला रहता था।नगर निगम और प्रशासन की उक्त कार्यवाही के बाद अब क्षेत्र के लोगों से वह बारात घर छिन गया है । इससे लोग सड़कों पर शादी ब्याह आदि आयोजन करने को विवश हैं। इससे भी असामाजिक तत्वों द्वारा कानून व्यवस्था की स्थिति भंग करने के प्रबल आसार हैं। मुस्लिम समुदाय के लोगों को ही इन खुराफाती तत्वों द्वारा निशाना बनाया जायेगा।

उक्त मैदान में ईद,बकरा ईद,मुहरर्म आदि अवसरों पर 20-25 हजार लोग विगत सात आठ दशकों से सामूहिक रूप से नमाज पढ़ते हैं, जो कि इस्लाम धर्म का अनिवार्य हिस्सा है।ईदगाह का मैदान छिन जाने से अब ये लोग ईद आदि पर कहां सामूहिक नमाज पढ़ेंगे?इसी मैदान में स्थित मजार पर उर्स ( मेला ) लगता है, जिसमें भी भारी भीड़ होती है।नगर निगम व प्रशासन द्वारा मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों के शौचालय को भी सीलबंद कर देना घोर अमानवीय व असंवेदनशील कृत्य है।

कि ईदगाह के उपरोक्त मैदान को रुद्रपुर और आसपास के पूरे ही क्षेत्र की समस्त जनता के मध्य ईदगाह मैदान के रूप में मान्यता प्राप्त है।किसी को उससे कभी कोई समस्या नहीं रही। कि भारत के संविधान और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों में स्पष्ट रूप से रेखांकित किया गया है कि भारत के हर नागरिक के सम्माजनक जीवन जीवन जीने और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराने की जिम्मेदारी राज्य और सरकार की है।नगर निगम और प्रशासन की उपरोक्त कार्यवाही भारत के संविधान के अनुच्छेद 14,21,25 और 26 का घोर उल्लंघन है।

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भारत में सरकारी स्कूलों को बदहाल स्थिति में पहुंचाने वाली संघ भाजपा से जुड़े लोगों द्वारा उक्त स्थान पर सरकारी स्कूल खोलने का दावा करना अत्यंत हास्यास्पद है,जनता को गुमराह करने का असफल प्रयास है और उनकी असल मंशा को ही जाहिर कर रहा है।आज गरीब मजदूर सहित 90% से भी ज्यादा आम गरीब लोग सरकारी स्कूलों में अपने बच्चे नहीं पढ़ा रहे हैं, क्योंकि सरकार द्वारा इन्हें बदहाल स्थिति में पहुंचा दिया गया है।

वक्ताओं ने कहा कि रुद्रपुर शहर और यह तराई का पूरा क्षेत्र कॉमी एकता का गुलदस्ता है। जिसका प्रत्यक्ष उदाहरण ईदगाह की जमीन को बचाने को गठित की गईं ईदगाह बचाओ संघर्ष समिति और उसके नेतृत्व में चल रहा यह सामूहिक सत्याग्रह और उपवास का कार्यक्रम है। जिसमें मजदूर, किसान, कर्मचारी, छात्र, महिला,सामाजिक संगठन और हिन्दू, मुस्लिम, शिख, ईसाई सभी समुदाय के साथी हजारों की संख्या में शामिल हैं।

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यही हमारे शहर, प्रदेश और देश की खूबसूरती है। हम इस क्षेत्र की कॉमी एकता को, सामाजिक सदभाव और भाईचारे को कमजोर करने को रची जा रही किसी भी साजिश को परवान नहीं चढने देंगे। भगतसिंह और अशफाक बिस्मिल के देश में धर्म के धंधे नहीं चलने देंगे। प्यार, मुहब्बत और भाईचारे के संदेश को जन जन तक पहुंचाएंगे।

कार्यक्रम के अन्त में प्रशासन को दो हफ्ते का समय दिया गया। ईदगाह के मैदान पर 5 दिसम्बर 2025 की स्थिति बहाल करके उसे तत्काल पीड़ित मुस्लिम समुदाय को हस्तगत करने, उसे पीड़ित मुस्लिम समुदाय के लिए निशुल्क आवंटित/फ्री होल्ड पट्टा आदि जारी करके दिया जाये। आगे के कार्यक्रम की रुपरेखा बनाकर आंदोलन को आगे बढ़ाया जायेगा। जब तक न्याय नहीं मिलेगा तब तक लोकतान्त्रिक तरीके से शांति, अनुशासन और धैर्य के साथ यह आंदोलन जारी रहेगा। चाहे कितना ही समय लग जाये, हम इसके लिए तैयार हैं।

आज के कार्यक्रम की अध्यक्षता ईदगाह कमेटी के सदर वाहिद मियां,इंकलाबी मजदूर केन्द्र के कैलाश भट्ट , क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन के शिवदेव सिंह , सेन्टर फार स्ट्रगलिंग यूनियंस के मुकुल ने की व संचालन साजिद खान, मजहर रिजवी, राजेश तिवारी, सुरेन्द्र, धीरज जोशी, अमर सैनी ने किया।

इनके अलावा वक्ताओं में डालफिन मजदूर संगठन से सुनीता, प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र से रविंदर कौर, पार्षद परवेज कुरैशी, अशफाक, एड.असगर रजा, समाजसेवी साजिद खान, उमर अली, पूर्व सभासद, सलीम अहमद व नूर अहमद, छात्र संघ उपाध्यक्ष चेतन भट्ट पूर्व छात्र संघ उपाध्यक्ष असलम भाई,

युवा नेता जीशान, पार्षद पति बाबू खान , गायत्री परिवार के उपेंद्र राय , जयदेव चंद्र मदक, बाबा बालक राम जी, कांग्रेस नेता मोहन खेड़ा, सोफिया नाज, रणजीत राणा, बंगाली समाज के संजय आइस, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय जुनेजा, CPI ML के ज्ञानी सुरेंद्र सिंह जी , शाहनवाज भाई, आदि ने सम्बोधित किया।


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