उत्तराखंड वन विभाग में बड़ा फेरबदल, पांच आईएफएस अधिकारियों के तबादले

देहरादून – उत्तराखंड शासन ने वन विभाग में प्रशासनिक फेरबदल करते हुए भारतीय वन सेवा (आईएफएस) के पांच अधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया है। नई तबादला सूची में अपर प्रमुख मुख्य वन संरक्षक (एपीसीसीएफ) से लेकर प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) स्तर के अधिकारियों को नई तैनाती दी गई है। इन बदलावों के तहत पिथौरागढ़, हल्द्वानी, तराई पूर्वी वन प्रभाग, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व और प्रशासनिक कार्यों से जुड़ी जिम्मेदारियों में फेरबदल किया गया है।

अगस्त में जारी बड़ी तबादला सूची के करीब एक महीने बाद हुए इन बदलावों को प्रशासनिक जरूरतों, जनहित और अधिकारियों की व्यक्तिगत परिस्थितियों से जोड़कर देखा जा रहा है। शासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां सौंप दी गई हैं।

नरेश कुमार को प्रशासन की जिम्मेदारी, जायका का अतिरिक्त प्रभार

आईएफएस अधिकारी नरेश कुमार को प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके साथ ही उन्हें जायका परियोजना का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। बताया गया है कि जायका परियोजना का पहला चरण पूरा होने के बाद वेतन संबंधी व्यवस्था को विभागीय ढांचे के अनुरूप बनाए रखने के उद्देश्य से यह बदलाव किया गया है।

दीपक कुमार पिथौरागढ़ भेजे गए, राहुल मिश्रा को तराई पूर्वी की जिम्मेदारी

तबादला सूची के तहत तराई पूर्वी वन प्रभाग में तैनात डीएफओ दीपक कुमार को स्थानांतरित कर पिथौरागढ़ भेजा गया है। सीमावर्ती क्षेत्र की संवेदनशीलता और प्रशासनिक आवश्यकताओं को इस बदलाव का आधार बताया गया है।

वहीं, कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में उपनिदेशक के पद पर तैनात राहुल मिश्रा को वहां से हटाकर तराई पूर्वी वन प्रभाग, हल्द्वानी में नई जिम्मेदारी सौंपी गई है। इस बदलाव से वन प्रभाग के प्रशासनिक कार्यों में नई तैनाती के अनुसार जिम्मेदारियों का पुनर्वितरण होगा।

आदित्य रत्न हल्द्वानी पहुंचे, शिरीन संजय को कॉर्बेट की कमान

पिथौरागढ़ में तैनात आदित्य रत्न को स्थानांतरित कर हल्द्वानी में उपवन संरक्षक की जिम्मेदारी दी गई है। बताया गया है कि पारिवारिक परिस्थितियों के चलते उनके अनुरोध पर यह निर्णय लिया गया।

इसी क्रम में राजाजी राष्ट्रीय पार्क में उपनिदेशक के पद पर तैनात शिरीन संजय को स्थानांतरित कर कॉर्बेट टाइगर रिजर्व का उपनिदेशक बनाया गया है। कॉर्बेट टाइगर रिजर्व वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता की दृष्टि से प्रदेश के महत्वपूर्ण संरक्षित क्षेत्रों में शामिल है। ऐसे में यहां की प्रशासनिक जिम्मेदारी अहम मानी जाती है।

शासन के इस फेरबदल के बाद वन विभाग के विभिन्न कार्यालयों और प्रभागों में अधिकारियों की नई तैनाती के अनुरूप कामकाज आगे बढ़ेगा।