
हल्द्वानी – आधुनिक दौर में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है, लेकिन इसका अत्यधिक उपयोग बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव डाल रहा है।
प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. रवि भैसोडा का कहना है कि आज बड़ी संख्या में बच्चे कम उम्र से ही घंटों मोबाइल पर वीडियो, गेम और सोशल मीडिया में व्यस्त रहते हैं, जिससे उनमें चिड़चिड़ापन, गुस्सा, एकाग्रता की कमी और सामाजिक व्यवहार में बदलाव जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
डॉ. रवि के अनुसार, जब बच्चों से अचानक मोबाइल छीन लिया जाता है तो वे रोने, गुस्सा करने या आक्रामक व्यवहार करने लगते हैं। लंबे समय तक स्क्रीन देखने से आंखों पर दबाव, नींद में कमी, पढ़ाई में मन न लगना और याददाश्त पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। छोटे बच्चों के लिए अत्यधिक स्क्रीन समय उनके भाषा, व्यवहार और मानसिक विकास को भी प्रभावित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि मोबाइल स्वयं बुरा नहीं है, बल्कि उसका सही और सीमित उपयोग आवश्यक है। शिक्षा, ऑनलाइन पढ़ाई, नई जानकारी प्राप्त करने, आपातकालीन संपर्क, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य संबंधी जानकारी और रचनात्मक सीखने के लिए मोबाइल एक उपयोगी साधन है। लेकिन मनोरंजन के नाम पर घंटों मोबाइल का इस्तेमाल बच्चों के भविष्य के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है।
डॉ. रवि ने अभिभावकों से अपील की कि वे बच्चों के साथ अधिक समय बिताएं, उन्हें खेलकूद, किताबें पढ़ने, चित्रकला और अन्य रचनात्मक गतिविधियों के लिए प्रेरित करें। भोजन के समय, सोने से पहले और पारिवारिक समय में मोबाइल का उपयोग न करने की आदत पूरे परिवार को अपनानी चाहिए। बच्चों के सामने माता-पिता का व्यवहार भी उनकी आदतों को प्रभावित करता है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी बच्चे में मोबाइल न मिलने पर अत्यधिक चिड़चिड़ापन, गुस्सा, पढ़ाई से दूरी या सामाजिक व्यवहार में बदलाव दिखाई दे रहा है तो इसे नजरअंदाज न करें और समय रहते विशेषज्ञ चिकित्सक से सलाह लें। बच्चों का स्वस्थ बचपन ही उनके उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है।

