शरीर की दिव्यांगता को पीछे छोड़ कर राजस्थान के पाली की रहने वाली शाजिया हसन ने रचा इतिहास,UTF की परीक्षा में हासिल किए 99.83 प्रतिशत अंक

एम सलीम खान ब्यूरो

जब इन्सान किसी मुकाम को हासिल करने का दिल में ताहिया कर लें तो उसके सामने बड़ी से बड़ी मुसीबत घूंटने ठेक देती है, शारीरिक कमजोर को कोसों दूर छोड़कर ऐसे जांबाज हौसले रखने वाले पहाड़ों का सीना चीर कर भी रास्ता बनाने का जजबा रखते हैं,ऐसी कुछ मिसाल पाली राजस्थान की रहने वाली शाजिया हसन ने साबित की है, शाजिया हसन शारीरिक रूप से दिव्यांग है,उनका एक हाथ और पैर दिव्यांग से पीड़ित हैं, अपनी शारीरिक कमजोरी को शाजिया हसन ने चुनौती देते हुए शिक्षा के क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है,

शाजिया का दोनों हाथो और पैरो से जन्म से पनप नहीं पाया, उन्होंने अपनी शारीरिक दिव्यागता को चुनौती देते हुए दर ब दर शिक्षा के क्षेत्र में खुद को लोहा सबिता कर दिया, उन्होंने कडी कठिनाइयों का कड़ा मुकाबला करते हुए खुद को साबित कर यू टी एफ परीक्षा में 99.82 अंक हासिल कर नया कीर्तिमान स्थापित कर दिया, शाजिया हसन के हौसलों की जमकर तारीफ की जा रही है, वहीं उनका नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया है, शाजिया हसन को लाखों लोगों की भीड़ में सम्मानित भी किया गया, इसके अलावा विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा उन्हें सम्मानित किया गया, इसके अलावा बहुत से लोगों ने उन्हें आगे की पढ़ाई में सहयोग करने का आव्हान किया है।

बचपन से था पढ़ाने का शौक सपना हुआ साकार – शाजिया हसनहसन

शरीर की दिव्यांगता को पीछे छोड़ कर राजस्थान के पाली की रहने वाली शाजिया हसन ने रचा इतिहास,UTF  की परीक्षा में हासिल किए 99.83 प्रतिशत अंक

अपना नाम गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज करने वाली शाजिया हसन ने बताया कि बचपन से उन्हे पढ़ाई और किताबों का पढ़ने का शौक था, बहुत सी बार उनकी दिव्यागता इसके आड़े आई लेकिन उन्होंने डटकर इसका सामना किया और हिम्मत नहीं हारी, उन्होंने कहा कि मैं लगातार पूरी उम्मीदों के साथ आगे बढ़ती चली गई और आज मैं उसी हौसले की वजह से इस मुकाम तक पहुंची हूं।

मां ने पढाई में मदद की मां की मेहनत का नतीजा – शाजिया हसन

शरीर की दिव्यांगता को पीछे छोड़ कर राजस्थान के पाली की रहने वाली शाजिया हसन ने रचा इतिहास,UTF  की परीक्षा में हासिल किए 99.83 प्रतिशत अंक

शाजिया हसन ने बताया कि उसकी मां ने उनकी हर कदम पर हौसला अफजाई की कापी किताबों की किल्लत नहीं होने दी, शुरुआत में कुछ कठिनाइयां जरुर आई लेकिन मेरी मां ने कदम पीछे नहीं खिंचे और लगातार जी तोड़ मेहनत कर मेरे हौसलों को परसत नहीं होने दिया, और आप देख सकते हैं मां की मेहनत ने मुझे किस मुकाम तक पहुंचा दिया।