
नैनीताल – राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के माननीय सदस्य एवं न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने मंगलवार को नैनीताल क्लब में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में जनपद नैनीताल की पर्यावरणीय स्थिति एवं एनजीटी द्वारा पारित आदेशों के अनुपालन की विस्तृत समीक्षा की। बैठक में नैनी झील एवं उसके जलागम क्षेत्र के संरक्षण, वायु एवं जल गुणवत्ता प्रबंधन, ठोस एवं तरल अपशिष्ट निस्तारण, तालाबों, झीलों एवं नदी किनारे अवैध निर्माणों पर रोक तथा वन एवं जैव विविधता संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन चर्चा की गई।
बैठक के दौरान न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि नैनी झील में प्रदूषण रोकना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उन्होंने झील के चारों ओर ड्रेनेज सिस्टम को सुदृढ़ करने, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) की क्षमता बढ़ाने तथा आवश्यकतानुसार नए एसटीपी निर्माण कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए स्थान चयन करते समय यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि उसका किसी भी नदी, नाले, प्राकृतिक जल स्रोत अथवा जलधारा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
उन्होंने कहा कि यदि पहाड़ों की प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखना है तो नदी-नालों, प्राकृतिक स्रोतों, जलधाराओं और नौलों का संरक्षण अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि ठोस अपशिष्ट के स्रोत स्तर पर पृथक्करण, गीले एवं सूखे कचरे के अलग-अलग संग्रहण तथा वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण को प्राथमिकता दी जाए।
न्यायमूर्ति डॉ. अहमद ने पर्यटन सीजन के दौरान बढ़ने वाले कूड़े-कचरे की समस्या को गंभीरता से लेते हुए विशेष कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नगर निकायों को डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण व्यवस्था को शत-प्रतिशत लागू करना चाहिए, जिससे पर्यावरणीय प्रदूषण पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सके।
बैठक में एनजीटी द्वारा समय-समय पर जारी किए गए आदेशों के अनुपालन की विभागवार समीक्षा की गई। लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण तथा त्रैमासिक अनुपालन रिपोर्ट समय पर एनजीटी को भेजने के निर्देश भी दिए गए। उन्होंने स्थानीय नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने के लिए व्यापक जनजागरूकता अभियान संचालित करने पर भी बल दिया।
बैठक में कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत ने मंडल में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के तहत किए जा रहे कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जनपद ऊधम सिंह नगर के रुद्रपुर में वर्षों से जमा पुराने ठोस अपशिष्ट का शत-प्रतिशत निस्तारण कर लिया गया है। इसी प्रकार मंडल के अन्य नगरीय क्षेत्रों में भी ठोस अपशिष्ट प्रबंधन संबंधी कार्य तेजी से संचालित किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि नैनीताल में प्रस्तावित एसटीपी निर्माण के लिए भूमि का चयन कर लिया गया है। साथ ही शहर की पुरानी सीवरेज लाइन को बदलने के लिए 121 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उन्होंने सूखाताल पुनर्जीवन परियोजना में मिली सफलता की भी जानकारी दी।
कुमाऊं आयुक्त ने विभिन्न नगरीय क्षेत्रों में ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए भूमि की उपलब्धता की समस्या, अत्यधिक एलईडी प्रकाश से वन्यजीवों पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव तथा ध्वनि प्रदूषण जैसे मुद्दों की ओर भी एनजीटी सदस्य का ध्यान आकर्षित किया। इसके अतिरिक्त पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और बागेश्वर जनपदों में सीवरेज योजनाओं के लिए तैयार की गई डीपीआर की जानकारी भी साझा की गई। उन्होंने बताया कि नगर निगम हल्द्वानी द्वारा बैणी सेना के माध्यम से कूड़ा संग्रहण का अभिनव मॉडल संचालित किया जा रहा है, जिसे सराहना मिल रही है। इन प्रयासों की न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने भूरि-भूरि प्रशंसा की।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने बैठक में बताया कि जनपद नैनीताल के सभी नगरीय क्षेत्रों से प्रतिदिन लगभग 230 मीट्रिक टन कूड़ा एकत्रित कर हल्द्वानी स्थित गौलापार ट्रंचिंग ग्राउंड में पहुंचाया जाता है। वहां प्रतिदिन 250 मीट्रिक टन क्षमता वाली आधुनिक कूड़ा निस्तारण मशीन शीघ्र स्थापित की जा रही है, जिससे प्रतिदिन एकत्रित होने वाले समस्त कूड़े का वैज्ञानिक निस्तारण किया जा सकेगा।
उन्होंने यह भी बताया कि ट्रंचिंग ग्राउंड में पूर्व से जमा लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन कूड़े में से 1.75 लाख मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण किया जा चुका है तथा शेष कूड़े के निस्तारण की प्रक्रिया तेजी से जारी है। जिलाधिकारी ने जिले में पर्यावरण संरक्षण के लिए अब तक किए गए कार्यों, भविष्य की योजनाओं तथा प्रमुख चुनौतियों की भी विस्तृत जानकारी दी।
बैठक के दौरान मुख्य विकास अधिकारी अरविंद कुमार पांडे, प्रभागीय वनाधिकारी नैनीताल आकाश गंगवार, पुलिस अधीक्षक जगदीश चंद्र, अपर जिलाधिकारी सौरभ असवाल, नगर आयुक्त हल्द्वानी परितोष वर्मा, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी, विभिन्न नगर निकायों के अधिशासी अधिकारी, सिंचाई, पेयजल निगम, जल संस्थान तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
बैठक के अंत में न्यायमूर्ति डॉ. अफरोज अहमद ने कहा कि नैनीताल की पारिस्थितिक संवेदनशीलता को देखते हुए पर्यावरण संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने आश्वस्त किया कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा जनपद को पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मामलों में हर संभव तकनीकी एवं कानूनी सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा।
