
रोड शो में पुष्पवर्षा से भव्य स्वागत, 60 वीर नारियों व 80 वीर योद्धाओं को किया सम्मानित
खटीमा – उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने गुरुवार को खटीमा स्थित खेतलसंडा में सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन द्वारा स्वर्गीय सूबेदार श्री शेर सिंह धामी की छठी पुण्यतिथि पर आयोजित गौरव सैनिक सम्मान समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर उन्होंने 715.51 लाख रुपये की लागत से नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन तथा 162.26 लाख रुपये से निर्मित सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण किया।
कार्यक्रम की शुरुआत एनसीसी बैंड द्वारा मुख्यमंत्री के स्वागत से हुई। इसके पश्चात मुख्यमंत्री ने अपने पिता स्वर्गीय सूबेदार श्री शेर सिंह धामी के चित्र पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इसके उपरांत उन्होंने नैनीताल, ऊधम सिंह नगर एवं चम्पावत जनपद के शहीदों के चित्रों पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने शहीदों के परिजनों एवं वीर नारियों को शॉल ओढ़ाकर और उपहार भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में सैनिक सम्मान समारोह में उपस्थित वीर सैनिकों, वीरांगनाओं, सैन्य अधिकारियों और खटीमा क्षेत्र की जनता का स्वागत एवं अभिनंदन किया। उन्होंने बताया कि इस अवसर पर 60 वीर नारियों और 80 वीर योद्धाओं को सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि खटीमा में नवनिर्मित सीएसडी कैंटीन और अत्याधुनिक सैनिक मिलन केंद्र का लोकार्पण करना उनके लिए सौभाग्य की बात है।
मुख्यमंत्री ने आयोजन से जुड़े सभी आयोजकों, सेवा संकल्प धारिणी फाउंडेशन के स्वयंसेवकों एवं क्षेत्रवासियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम उनके पूज्य पिता की स्मृति को समर्पित है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि छह वर्ष पूर्व आज का दिन उनके जीवन का सबसे पीड़ादायक दिन था, जब उन्होंने अपने पिता को खो दिया था। उनके विचार, सिद्धांत और संघर्षपूर्ण जीवन आज भी उन्हें हर कदम पर मार्गदर्शन देते हैं।
उन्होंने कहा कि बचपन में अपने पिता की वर्दी को देखकर उनके मन में गर्व और जिज्ञासा का भाव उत्पन्न होता था। उनके पिता वर्दी को अत्यंत सलीके से रखते थे और मानते थे कि एक फौजी के लिए उसकी वर्दी ही उसका सम्मान और जिम्मेदारी होती है। उन्होंने कहा कि राजनीति को उन्होंने कभी पद प्राप्ति का माध्यम नहीं माना, बल्कि जनसेवा का माध्यम समझा, जो उन्हें उनके पिता ने ही सिखाया।
मुख्यमंत्री ने बताया कि उनके पिता ने 28 वर्षों तक सेना की महार रेजिमेंट में सेवा देते हुए 1962 के भारत-चीन युद्ध, 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्ध सहित ऑपरेशन ब्लूस्टार और ऑपरेशन रक्षक जैसे महत्वपूर्ण अभियानों में भाग लिया। उन्होंने कहा कि बचपन में वे अपने पिता से वीर सैनिकों की कहानियां सुनते थे, जिससे उनके मन में सेना के प्रति सम्मान और प्रेरणा जागृत हुई।
उन्होंने कहा कि आज भले ही वे सेना में नहीं हैं, लेकिन सैनिकों को अपना आदर्श मानते हुए राष्ट्र सेवा में योगदान देने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में रक्षा क्षेत्र में हुए सकारात्मक परिवर्तनों की सराहना करते हुए कहा कि आज भारत रक्षा उत्पादन और निर्यात के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि “मेक इन इंडिया” से “मेक फॉर द वर्ल्ड” तक की यात्रा देश की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2014-15 में भारत का रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 1.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। इसी प्रकार रक्षा निर्यात भी बढ़कर 38 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जो पहले 1 हजार करोड़ रुपये से भी कम था। उन्होंने कहा कि आज भारत 80 से अधिक देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों और उनके परिवारों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। शहीदों के परिजनों को मिलने वाली अनुग्रह राशि को पांच गुना तक बढ़ाया गया है तथा आश्रितों को सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। इसके अलावा वीरता पुरस्कार प्राप्त सैनिकों को दी जाने वाली राशि में भी अभूतपूर्व वृद्धि की गई है। उन्होंने बताया कि परमवीर चक्र विजेताओं को मिलने वाली राशि को 50 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 करोड़ रुपये किया गया है।
उन्होंने कहा कि देहरादून में भव्य सैन्य धाम का निर्माण किया जा रहा है, जो आने वाली पीढ़ियों को राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा देगा। साथ ही बलिदानियों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने, आवेदन अवधि को 2 वर्ष से बढ़ाकर 5 वर्ष करने, नौकरी पूर्व प्रशिक्षण एवं पुत्री विवाह अनुदान जैसी योजनाएं भी संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में सैनिकों एवं पूर्व सैनिकों को सरकारी बसों में निःशुल्क यात्रा की सुविधा दी जा रही है तथा 25 लाख रुपये तक की स्थायी संपत्ति खरीदने पर स्टाम्प ड्यूटी में 25 प्रतिशत की छूट भी प्रदान की जा रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड केवल देवभूमि ही नहीं, बल्कि वीरभूमि भी है और यहां के वीर सपूतों ने देश के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर किया है।
इस अवसर पर कृषि एवं सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि सैनिकों और उनके परिजनों का सम्मान करना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सैनिकों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि देहरादून में सैन्य धाम के निर्माण के लिए 28 नदियों का जल और सैनिकों के घरों से मिट्टी लाई गई है। साथ ही बनबसा में सैनिक सामुदायिक भवन का निर्माण भी किया जाएगा।
कार्यक्रम में सांसद अजय भट्ट, कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, विधायक राजस्थान कुलदीप धनकड़, दर्जा मंत्री विनय रुहेला सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी अपने विचार व्यक्त किए और स्वर्गीय सूबेदार शेर सिंह धामी को श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर श्रीमती विशना देवी, गीता धामी, कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा, गणेश जोशी, राम सिंह कैड़ा, दर्जा मंत्री विनय रोहेला, अनिल कपूर डब्बू, शंकर कोरंगा, फरजाना बेगम, हेमराज, ध्रुव रौतेला, विधायक शिव अरोरा, त्रिलोक सिंह चीमा, विधायक राजस्थान कुलदीप धनकड़, जिला पंचायत अध्यक्ष अजय मौर्य, जिलाध्यक्ष कमल जिंदल, मेयर विकास शर्मा, दीपक बाली, गजराज बिष्ट,
नगर पालिका अध्यक्ष रमेश जोशी, प्रेम सिंह टूरना, ब्लॉक प्रमुख सरिता राणा, पूर्व विधायक डॉ. प्रेम सिंह राणा, लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया, जिलाधिकारी चम्पावत मनीष कुमार, एसएसपी अजय गणपति, एसपी चम्पावत रेखा यादव, अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय, एसपी जितेन्द्र चौधरी, एएसपी डॉ. उत्तम सिंह नेगी, पूर्व सैनिक अध्यक्ष गम्भीर सिंह धामी सहित बड़ी संख्या में पूर्व सैनिक एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।


