
रुद्रपुर – मनोज सरकार स्टेडियम में देवभूमि शतरंज एसोसिएशन के तत्वावधान में आयोजित चार दिवसीय प्रथम स्वर्गीय धीरज सिंह रघुवंशी मेमोरियल ओपन शतरंज प्रतियोगिता का शुक्रवार को जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने शुभारंभ किया। 23 से 26 जुलाई तक आयोजित होने वाली इस प्रतियोगिता में भारत एवं नेपाल के करीब 300 शतरंज खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं।
मुख्य अतिथि जिलाधिकारी नितिन सिंह भदौरिया ने प्रतियोगिता का उद्घाटन करते हुए सभी खिलाड़ियों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि खेल आपसी भाईचारे, अनुशासन और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा की भावना को मजबूत करते हैं। भारत के साथ नेपाल के खिलाड़ियों की सहभागिता जनपद के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि मनोज सरकार स्टेडियम में इस स्तर की शतरंज प्रतियोगिता का पहली बार आयोजन किया जा रहा है, जिसके लिए उन्होंने देवभूमि शतरंज एसोसिएशन को बधाई दी।
जिलाधिकारी ने खिलाड़ियों से खेल भावना के साथ प्रतियोगिता में भाग लेने और प्रतियोगिता का भरपूर आनंद उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रतियोगिता के दौरान यदि किसी खिलाड़ी को किसी प्रकार की असुविधा होती है तो जिला प्रशासन उसकी समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करेगा।
कार्यक्रम के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वर्ण पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन करने वाले राहुल सिंह बोहरा और कुणाल सिंह नेगी को जिलाधिकारी ने सम्मानित भी किया।
विशिष्ट अतिथि मुख्य विकास अधिकारी दिवेश शास्त्री ने कहा कि जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद में खेल सुविधाओं के विस्तार और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार कार्य किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों को उत्कृष्ट सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
देवभूमि शतरंज एसोसिएशन के महासचिव संजीव चौधरी ने बताया कि प्रतियोगिता में भारत और नेपाल के लगभग 300 खिलाड़ी भाग ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि चार दिवसीय प्रतियोगिता के विजेता को चार लाख रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी।
इस अवसर पर उत्तराखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डी.डी. के सिंह, देवभूमि शतरंज एसोसिएशन की कोषाध्यक्ष सीमा सिंह, जिला क्रीड़ा अधिकारी जानकी कार्की, शतरंज एसोसिएशन नैनीताल के अध्यक्ष टिंकू, सीनियर इंटरनेशनल आर्बिटर आर.सी. तिवारी, मृत्युंजय सिंह, रूपेश, अभि सिंह सहित बड़ी संख्या में खिलाड़ी, खेल प्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

