चकाचौंध से दूरी, संगठन से निष्ठा: पसमांदा समाज के ‘अभिभावक’ बने फैयाज अहमद

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देहरादून – भारतीय राजनीति में कुछ ऐसे चेहरे होते हैं जो स्वयं सुर्खियों में कम दिखाई देते हैं, लेकिन संगठन और समाज की दिशा तय करने में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे ही व्यक्तित्वों में एक नाम है — फैयाज अहमद, जिन्होंने पसमांदा समाज को सामाजिक और राजनीतिक मुख्यधारा से जोड़ने के लिए वर्षों तक शांत लेकिन प्रभावशाली तरीके से कार्य किया।

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जनपद के चिलकाना कस्बे से ताल्लुक रखने वाले फैयाज अहमद वर्तमान में देहरादून और चिलकाना को अपना प्रमुख कार्यक्षेत्र बनाए हुए हैं। संपन्न पृष्ठभूमि से आने के बावजूद उन्होंने वैभव और सुविधाओं की जिंदगी से दूर रहकर पसमांदा समाज के उत्थान और संगठनात्मक मजबूती को अपना लक्ष्य बनाया।

भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में उन्हें पसमांदा समाज के एक मजबूत रणनीतिकार के रूप में देखा जाता है। उन्होंने स्वयं कभी चुनावी राजनीति में प्रत्यक्ष रूप से भाग नहीं लिया, लेकिन संगठन के भीतर रहकर कई कार्यकर्ताओं और नेताओं को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई।

वर्ष 2010 में भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता ग्रहण करने के बाद से उन्होंने पसमांदा समाज को जागरूक करने और उसे राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए लगातार कार्य किया। ‘ऑल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज़’ और ‘भारतीय पसमांदा मंच’ जैसे मंचों के माध्यम से उन्होंने विभिन्न राज्यों में अभियान चलाकर समाज को संगठित करने का प्रयास किया।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के अलावा मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और दिल्ली जैसे राज्यों में भी उन्होंने संगठनात्मक गतिविधियों को मजबूती देने में योगदान दिया। उनकी कार्यशैली संवाद और जमीनी संपर्क पर आधारित रही है। कार्यकर्ताओं और आम लोगों से उनका सीधा जुड़ाव ही उन्हें एक नेता से अधिक ‘अभिभावक’ की पहचान देता है।

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राजनीतिक जीवन में कई उतार-चढ़ाव और चुनौतियों के बावजूद फैयाज अहमद ने हमेशा संगठनात्मक अनुशासन और मर्यादा को प्राथमिकता दी। विपरीत परिस्थितियों में भी उन्होंने संयम और धैर्य बनाए रखा तथा कभी भी संगठन विरोधी रुख नहीं अपनाया।

फैयाज अहमद का राजनीतिक और सामाजिक जीवन इस बात का उदाहरण माना जा रहा है कि निष्ठा, अनुशासन और समर्पण के बल पर बिना किसी प्रचार-प्रसार के भी समाज और संगठन में गहरी पहचान बनाई जा सकती है।


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