गौला नदी का बढ़ रहा जलस्तर, PWD ने हल्द्वानी-चोरगलिया मार्ग का किया निरीक्षण

हल्द्वानी – पहाड़ों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश का असर अब गौला नदी के जलस्तर पर भी साफ दिखाई देने लगा है। इस मानसून में पहली बार गौला नदी उफान पर नजर आ रही है, जिससे काठगोदाम और हल्द्वानी क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।

गौला नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए लोक निर्माण विभाग भी अलर्ट मोड में आ गया है। विभाग के अधिशासी अभियंता प्रत्युष कुमार ने हल्द्वानी-चोरगलिया रोड पर रेलवे फाटक से गौला पुल को जोड़ने वाली सड़क का निरीक्षण कर नदी किनारे कराए गए सुरक्षा कार्यों का जायजा लिया।

निरीक्षण के दौरान नदी किनारे बनाया गया प्रोटेक्शन वर्क फिलहाल सुरक्षित पाया गया। गौरतलब है कि पिछले वर्ष बरसात के दौरान गौला नदी के तेज बहाव से यह सड़क क्षतिग्रस्त हो गई थी। इसके बाद सड़क का पुनर्निर्माण कराने के साथ ही नदी की ओर सुरक्षा के लिए प्रोटेक्शन वर्क कराया गया था।

हालांकि विभाग का कहना है कि वर्तमान में पूरा किया गया सुरक्षा कार्य सुरक्षित है, लेकिन सुरक्षा दीवार और अन्य प्रोटेक्शन कार्यों का कुछ हिस्सा अभी अधूरा पड़ा है। बताया जा रहा है कि बजट उपलब्ध न होने के कारण शेष कार्य को फिलहाल पूरा नहीं किया जा सका है।

लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता प्रत्युष कुमार ने बताया कि शेष सुरक्षा कार्यों को पूरा कराने के लिए आपदा विभाग को करीब ₹2 करोड़ का प्रस्ताव भेजा गया है, लेकिन प्रस्ताव अभी मंजूरी के इंतजार में लंबित है।

ऐसे में गौला नदी के लगातार बढ़ते जलस्तर के बीच अधूरे सुरक्षा कार्य चिंता का विषय बने हुए हैं। यदि आने वाले दिनों में पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश का दौर और तेज होता है तथा नदी का जलस्तर बढ़ता है तो अधूरे हिस्सों पर दबाव बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

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पिछले वर्ष इसी मार्ग को गौला नदी के तेज बहाव से भारी नुकसान पहुंचा था। सड़क के पुनर्निर्माण और सुरक्षा कार्यों के बावजूद इस बार मानसून में गौला के बढ़ते तेवरों ने एक बार फिर इस महत्वपूर्ण मार्ग की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

फिलहाल लोक निर्माण विभाग की ओर से लगातार स्थिति पर नजर रखी जा रही है और अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण कर सुरक्षा कार्यों की स्थिति का जायजा लिया है। अब निगाहें आपदा विभाग पर टिकी हैं कि लंबित ₹2 करोड़ के प्रस्ताव को कब मंजूरी मिलती है। बढ़ती बारिश और उफनती गौला नदी के बीच समय रहते शेष प्रोटेक्शन वर्क पूरा कराना विभाग के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।